बिहार की राजनीति में महा-उलटफेर: नीतीश कुमार कल भरेंगे राज्यसभा का नामांकन, भाजपा का होगा मुख्यमंत्री
पटना | 4 मार्च 2026
बिहार की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल, 5 मार्च को दोपहर 11:30 बजे राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस बड़े कदम के साथ ही नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे और बिहार की सत्ता की कमान पूरी तरह से भाजपा के हाथों में सौंप दी जाएगी। इस नए समीकरण में सबसे चौंकाने वाला नाम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का है, जिन्हें बिहार का नया डिप्टी सीएम बनाए जाने की प्रबल संभावना है।
जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेताओं ने इस खबर की पुष्टि की है। इस पूरी सियासी प्रक्रिया और सत्ता हस्तांतरण की निगरानी के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कल खुद पटना पहुंच रहे हैं।
निशांत कुमार की सियासी एंट्री और डिप्टी सीएम का पद
दशकों तक परिवारवाद की राजनीति का विरोध करने वाले नीतीश कुमार अब अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति की मुख्यधारा में लाने की तैयारी कर चुके हैं। इंजीनियरिंग ग्रेजुएट निशांत कुमार अब तक राजनीतिक चकाचौंध से दूर रहे हैं, लेकिन हालिया दिनों में उनकी सक्रियता और जदयू के पोस्टर्स में उनकी मौजूदगी ने इस बदलाव के संकेत पहले ही दे दिए थे। पार्टी के महासचिव श्रीभगवान सिंह कुशवाहा समेत कई दिग्गजों ने स्पष्ट किया है कि निशांत कुमार अब बिहार की सेवा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
जदयू और भाजपा का नया शक्ति समीकरण
जदयू ने अपने सभी विधायकों को आज शाम तक पटना पहुंचने का फरमान जारी कर दिया है। आज होने वाली हाई-प्रोफाइल बैठक में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और राज्य में नए नेतृत्व के चयन पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए सम्राट चौधरी या विजय सिन्हा जैसे अनुभवी चेहरों के नाम रेस में सबसे आगे हैं। भाजपा ने पहले ही नितिन नवीन और शिवेश कुमार को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, और अब जदयू की सीटों पर नीतीश और निशांत के नाम तय माने जा रहे हैं।
विपक्ष का हमला और सुशासन पर सवाल
विपक्ष ने नीतीश कुमार के इस कदम को सिद्धांतों से समझौता करार दिया है। बार-बार गठबंधन बदलने और अब परिवारवाद की राह पर चलने को लेकर विरोधी दल उन्हें घेरने में जुटे हैं। हालांकि, एनडीए समर्थकों का मानना है कि यह पुरानी पीढ़ी के अनुभव और नई पीढ़ी की ऊर्जा का एक बेहतरीन तालमेल साबित होगा। 2025 के जनादेश के मात्र चार महीने बाद इस बड़े बदलाव ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है।
कल का दिन बिहार के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होगा। क्या बिहार की जनता इस नए नेतृत्व और समीकरण को सहजता से स्वीकार करेगी या यह कदम राज्य में नई राजनीतिक अस्थिरता को जन्म देगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
