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BY: ब्यूरो चीफ   |   EDITED BY: ब्यूरो चीफPUBLISHED: Tue, 07 Apr 2026 07:03 GMT+0530

मदुरई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी, पीड़ित परिवार को 1 करोड़ 40 लाख का मुआवजा

मदुरई, 7 अप्रैल 2026
तमिलनाडु की मदुरई की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोमवार को 2020 के चर्चित सथानकुलम कस्टोडियल यातना मामले में एक सनसनीखेज और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन ने पिता-पुत्र की पुलिस हिरासत में हुई क्रूर हत्या के मामले में सभी 9 दोषी पुलिसकर्मियों को मौत की सजा (कुछ को डबल डेथ सेंटेंस) सुनाई। साथ ही अदालत ने दोषी अधिकारियों पर कुल 1 करोड़ 40 लाख रुपये का मुआवजा पीड़ित परिवार को देने का आदेश दिया। कोर्ट ने इसे ‘rareest of rare’ मामला करार देते हुए कहा कि पुलिस की इस बर्बरता ने पूरी व्यवस्था को कलंकित किया है।

क्रूर घटना का पूरा ब्योरा
यह पूरा मामला तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के सथानकुलम थाने का है। 19 जून 2020 को कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान स्थानीय मोबाइल दुकानदार पी. जयराज (उम्र 59 वर्ष) को पुलिस ने दुकान खुली रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। जब उनके बेटे जे. बेनिक्स (उम्र 31 वर्ष) पिता की रिहाई के लिए थाने पहुंचे तो पुलिस ने दोनों को निशाना बनाया।

पुलिसकर्मियों ने पिता-पुत्र को थाने में पूरी रात बेरहमी से पीटा, गालियां दीं और यातना दी। अगले दिन बिना किसी मेडिकल जांच या इलाज के दोनों को न्यायिक हिरासत में कोविलपट्टी सब-जेल भेज दिया गया। हिरासत के दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। 22 जून को बेनिक्स की सरकारी अस्पताल में मौत हो गई, जबकि 23 जून को जयराज ने भी दम तोड़ दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यातना के स्पष्ट निशान मिले थे।

CBI जांच और कोर्ट का फैसला
प्रारंभ में स्थानीय पुलिस ने मामला दबाने की कोशिश की, लेकिन मदुरई बेंच ऑफ मद्रास हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद CBI ने जांच संभाली। CBI ने 10 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया। लंबी सुनवाई के बाद 23 मार्च 2026 को कोर्ट ने सभी 9 पुलिसकर्मियों को हत्या (IPC धारा 302) समेत अन्य धाराओं का दोषी ठहराया।

सोमवार को सजा सुनाते हुए न्यायाधीश मुथुकुमारन ने कहा, “पुलिस की इस क्रूरता ने न सिर्फ दो निर्दोष जिंदगियों को खत्म किया, बल्कि लोकतंत्र और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। यह ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला है।”

दोषी पुलिसकर्मी (जिन्हें फांसी की सजा हुई):
– इंस्पेक्टर एस. श्रीधर (मुख्य आरोपी- डबल डेथ सेंटेंस)
– सब-इंस्पेक्टर के. बालकृष्णन
– सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश
– हेड कांस्टेबल एस. मुरुगन
– हेड कांस्टेबल ए. सामीदुरै
– कांस्टेबल एम. मुथुराज
– कांस्टेबल एस. चेल्लादुरै
– कांस्टेबल एक्स. थॉमस फ्रांसिस
– कांस्टेबल एस. वेल्लिमुथु

कोर्ट ने मुख्य आरोपी इंस्पेक्टर श्रीधर पर 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जबकि अन्य पर अलग-अलग धाराओं के तहत अतिरिक्त सजाएं और जुर्माने की राशि तय की गई। कुल मुआवजे की राशि 1 करोड़ 40 लाख रुपये पीड़ित परिवार (बेनिक्स की मां) को देने का आदेश दिया गया।

देशव्यापी आक्रोश और महत्व
2020 में इस घटना ने पूरे देश में पुलिस बर्बरता को लेकर भारी आक्रोश पैदा कर दिया था। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए थे। CBI की जांच में पुलिस की मिलीभगत और सबूत मिटाने की कोशिश भी सामने आई थी।

यह फैसला उन परिवारों के लिए न्याय की मिसाल बन गया है जो सालों से कस्टोडियल डेथ के खिलाफ लड़ रहे हैं। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला पुलिस बल में सुधार और जवाबदेही की दिशा में एक मजबूत कदम है। हालांकि, दोषी पुलिसकर्मी इस फैसले के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं।

परिवार की प्रतिक्रिया:
पीड़ित परिवार ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि आखिरकार 6 साल बाद न्याय मिला। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह फैसला भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मददगार साबित होगा।

यह फैसला न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह वर्दी में हो, अपराध से ऊपर नहीं है।