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BY: ब्यूरो चीफ   |   EDITED BY: ब्यूरो चीफPUBLISHED: Mon, 15 Jun 2026 23:27 GMT+0530

शाहाबाद सीएचसी की व्यवस्थाएं बदहाल, महिला वार्ड में बंद पड़े पंखे-लाइटें; मरीज और तीमारदार परेशान

संवाददाता : मुस्तफा अली एडवोकेट

शाहाबाद। भीषण गर्मी के दौर में शाहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों का आरोप है कि बिजली कटौती के दौरान अस्पताल का जनरेटर तक नहीं चलाया जाता, जिसके कारण वार्डों में अंधेरा छा जाता है और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बताया जाता है कि इन दिनों क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच अस्पताल में बिजली की समस्या लगातार बनी हुई है। मरीजों का कहना है कि बिजली जाते ही वार्डों के पंखे और लाइटें बंद हो जाती हैं, लेकिन इसके बावजूद जनरेटर चालू नहीं किया जाता। इससे विशेष रूप से महिला वार्ड में भर्ती मरीजों को घुटन, उमस और असहनीय गर्मी झेलनी पड़ रही है।

तीमारदारों का आरोप है कि कई बार बिजली लंबे समय तक बाधित रहती है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती। मरीजों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए आने वाले लोगों को पहले से बीमारी की परेशानी होती है, ऊपर से गर्मी और बिजली संकट उनकी मुश्किलें और बढ़ा देता है।

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि अस्पताल परिसर में अनुशासन और व्यवस्थाओं का अभाव दिखाई दे रहा है। सीएचसी की इमरजेंसी के सामने स्थित मैदान में अस्पताल कर्मियों तथा बाहरी लोगों द्वारा नियमित रूप से क्रिकेट खेला जाता है। लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर, जहां मरीजों की आवाजाही और एंबुलेंस का आवागमन बना रहता है, वहां खेल गतिविधियां उचित नहीं हैं।

नागरिकों का कहना है कि अस्पताल परिसर में हर रोज क्रिकेट खेले जाने से मरीजों और उनके परिजनों को असुविधा होती है। कई बार गेंद वार्डों और इमरजेंसी के आसपास तक पहुंच जाती है, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर अस्पताल की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनरेटर को नियमित रूप से संचालित कराया जाए, महिला वार्ड सहित सभी वार्डों में बिजली और पंखों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा अस्पताल परिसर में अनावश्यक गतिविधियों पर रोक लगाई जाए, ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में लोगों को और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।