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BY: ब्यूरो चीफ   |   EDITED BY: ब्यूरो चीफPUBLISHED: Thu, 17 Sep 2026 04:39 GMT+0530

मदरसा पंजीकरण में कथित जालसाजी: दो वांछित आरोपी गिरफ्तार

आपसी मतभेदों और शिकायतों के चलते मदरसों पर सरकारी कार्रवाई का सिलसिला, मुस्लिम समाज में सुधार और एकता की जरूरत पर जोर

मुबारकपुर। मदरसा संचालन एवं प्रबंध समिति के पंजीकरण के लिए कथित रूप से फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी किए जाने के मामले में मुबारकपुर पुलिस ने दो वांछित आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मदरसा जामिया अरबिया ऐनुल इस्लाम, नेवादा के पास से मदरसा प्रबंधक जमील अहमद नजीरी और प्रधानाचार्य जलीस अहमद को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, नेवादा निवासी राहत हुसैन पुत्र फजलुर्रहमान की तहरीर पर 15 सितंबर 2026 को मुबारकपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप है कि मदरसा संचालन एवं प्रबंध समिति के पंजीकरण के उद्देश्य से कथित रूप से फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

विवेचना के दौरान जमील अहमद नजीरी, प्रबंधक तथा जलीस अहमद, प्रधानाचार्य के नाम वांछित आरोपियों के रूप में सामने आए। इसके बाद पुलिस दोनों की तलाश में जुटी हुई थी। बुधवार को उपनिरीक्षक रामचरन यादव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मदरसा जामिया अरबिया ऐनुल इस्लाम, नेवादा के पास कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को दोपहर करीब 1 बजकर 50 मिनट पर गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक विवेक सिंह, हेड कांस्टेबल त्रिलोकीनाथ सिंह और कांस्टेबल सुनील कुमार गुप्ता शामिल रहे। पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया की जा रही है।

आपसी मतभेदों का खामियाजा मदरसों को?

यह मामला केवल एक मुकदमे और दो गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने एक बार फिर मुस्लिम समाज में आपसी मतभेद, व्यक्तिगत विवाद और प्रबंधकीय खींचतान के चलते मदरसों के खिलाफ होने वाली सरकारी कार्रवाई को लेकर चर्चा को जन्म दिया है। यदि किसी मदरसे की प्रबंध समिति के भीतर के विवाद शिकायत और मुकदमे का रूप ले लेते हैं तो उसका सीधा प्रभाव संस्था, विद्यार्थियों, शिक्षकों और पूरे शैक्षिक वातावरण पर पड़ता है।

उत्तर प्रदेश में मदरसों का मामला पिछले कुछ समय से कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 2024 में मदरसा एक्ट से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए मदरसा एक्ट के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया था। न्यायालय के रिकॉर्ड में उस समय प्रदेश में लगभग 16 हजार मदरसों और उनमें अध्ययनरत लगभग 17 लाख विद्यार्थियों का उल्लेख सामने आया था।

ऐसे हालात में मुस्लिम समाज के जिम्मेदार लोगों के लिए यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि मदरसों के प्रशासनिक मामलों को आपसी विवादों से किस प्रकार सुरक्षित रखा जाए, पंजीकरण और दस्तावेजों से जुड़े मामलों में पूर्ण पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाए और किसी भी शिकायत को व्यक्तिगत विवाद के बजाय कानूनी एवं संस्थागत तरीके से हल करने की व्यवस्था कैसे मजबूत की जाए।

मदरसों को धार्मिक एवं शैक्षिक संस्थानों के साथ-साथ हजारों विद्यार्थियों और परिवारों के भविष्य से जुड़े संस्थान के रूप में भी देखा जाता है। ऐसे में प्रबंधकों, शिक्षकों, उलेमा और संबंधित लोगों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे सभी कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए संस्थाओं के संचालन में पारदर्शिता और दस्तावेजों की शुद्धता सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी जटिलता की स्थिति उत्पन्न न हो।

वर्तमान मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है। कथित फर्जी दस्तावेजों की वास्तविकता, उनके तैयार किए जाने, इस्तेमाल किए जाने तथा मदरसा प्रबंधन से जुड़े अन्य तथ्यों की पूरी स्थिति पुलिस विवेचना और न्यायालय की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।