रामलीला के छठे दिन दशरथ के निधन का मंचन देख भावुक हुए दर्शक, भरत ने कैकेयी के फैसले पर जताया आक्रोश, श्रीराम को अयोध्या वापस लाने का लिया संकल्प
सैफनी। 30 अक्टूबर 2026 श्री सनातन धर्म आदर्श रामलीला महोत्सव के छठे दिन रामलीला मंचन में राजा दशरथ के देहावसान और भरत के अयोध्या आगमन सहित कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के इन मार्मिक दृश्यों को जीवंत कर दिया। मंचन के दौरान पंडाल में मौजूद दर्शक भावुक नजर आए।
प्रस्तुति में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन के बाद महाराजा दशरथ पुत्र वियोग में व्याकुल हो जाते हैं। श्रीराम को याद करते हुए वह अपने प्राण त्याग देते हैं। इसके बाद गुरु वशिष्ठ के संदेश पर ननिहाल में रह रहे भरत और शत्रुघ्न को अयोध्या बुलाया जाता है।
अयोध्या पहुंचने पर भरत को पिता के निधन और श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास की जानकारी मिलती है। यह सुनकर वह व्यथित हो उठते हैं और माता कैकेयी के निर्णय पर कड़ा विरोध जताते हैं। भरत स्पष्ट करते हैं कि उन्हें राजगद्दी का कोई मोह नहीं है और वह अपने बड़े भाई श्रीराम के स्थान पर शासन स्वीकार नहीं करेंगे।
इसके बाद भरत गुरु वशिष्ठ के मार्गदर्शन में पिता महाराजा दशरथ का विधि-विधान से अंतिम संस्कार करते हैं। साथ ही श्रीराम को वापस अयोध्या लाने के उद्देश्य से वन जाने का संकल्प लेते हैं। इन प्रसंगों के मंचन ने दर्शकों को रामायण के त्याग, भाईचारे और पारिवारिक मर्यादा का संदेश दिया।
इस अवसर पर रामलीला कमेटी अध्यक्ष सुशील कुमार जोशी फौजी, प्रबंधक शोभित शर्मा, एडवोकेट विमल कुमार जोशी, एडवोकेट जितेंद्र गुप्ता, मनोज जोशी, सुंदर पाण्डेय, रंजीत जोशी, शिशुपाल कश्यप और पंकज जोशी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।
