सैफनी में यादगार गौसुल आलम कॉन्फ्रेंस व जश्न-ए-दस्तारबंदी
22 तलबा की दस्तारबंदी, उलेमा ने इल्म-ए-दीन की अहमियत पर डाली रोशनी
महफ़ूज़ सकलैनी संवाददाता
सैफनी, रामपुर | कस्बा सैफनी में गुरुवार की रात दीनी रौनकों से जगमगा उठी जब हुज़ूर अशरफे मिल्लत, पीर-ए-तरीक़त अल्लामा सैय्यद मोहम्मद अशरफ अशरफी जीलानी (किछौचा शरीफ), की ज़ेरे-सरपरस्ती उर्स मैदान में “गौसुल आलम कॉन्फ्रेंस व जश्न-ए-दस्तारबंदी” का भव्य और रूहानी इज्तिमा आयोजित हुआ। कार्यक्रम बाद नमाज़-ए-इशा शुरू हुआ और देर रात तक नात, तकरीरों और दुआओं की गूंज से महफिल मुनव्वर रही। दूर-दराज़ से आए उलेमा-ए-किराम, मशाइख़, उलमा, क़ारी, तलबा और अकीदतमंदों की बड़ी तादाद मौजूद रही।
कार्यक्रम की सदारत शहर-ए-इमाम सैफनी हज़रत कारी मोहम्मद अतीकुर्रहमान साहब अशरफी ने फरमाई। मुख्य मेहमानों में हुज़ूर अशरफे मिल्लत, पीर-ए-तरीक़त अल्लामा सैय्यद मोहम्मद अशरफ अशरफी जीलानी (किछौछा शरीफ), हज़रत अल्लामा मुफ्ती सैय्यद मोहम्मद वाक़िफ अली अशरफी, हज़रत मुफ्ती मोहम्मद कासिमुल कादरी अशरफी नईमी और शायर-ए-इस्लाम हज़रत सैय्यद मोहम्मद उवैस मियां खास तौर पर शरीक हुए।
22 तलबा की दस्तारबंदी
इस रूहानी और ऐतिहासिक मौके पर कुल 22 तलबा की दस्तारबंदी की गई। दस्तारबंदी की रस्म बुज़ुर्ग उलेमा के हाथों अदा हुई, जिसके दौरान महफिल में दरूद-ओ-सलाम और दुआओं का सिलसिला जारी रहा। दस्तार हासिल करने वालों में मुफ्ती, मौलवी, क़ारी और हाफिज़-ए-कुरआन शामिल रहे। इस दृश्य ने माहौल को बेहद जज़्बाती और रूहानी बना दिया।
तकरीरों में इल्म, अमल और अख़लाक़ पर जोर
सदर-ए-महफिल हज़रत कारी अतीकुर्रहमान साहब ने अपने ख़िताब में कहा कि उलमा-ए-किराम उम्मत की रहनुमाई का सरमाया हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में इल्म के साथ अख़लाक़ और अमल की सख्त ज़रूरत है, ताकि समाज में अमन, भाईचारा और दीनी शऊर को फरोग़ मिले।
हुजूर अशरफ मियां साहब ने बयान की शान-ए-मौला अली
हुज़ूर अशरफे मिल्लत अल्लामा सैय्यद मोहम्मद अशरफ अशरफी जीलानी ने अपने पुरअसरार और रूहपरवर बयान में शान-ए-मौला अली कर्रमल्लाहु वजहहुल करीम पर तफ़सीली रोशनी डाली। उन्होंने मौला अली की इल्मी, रूहानी और इख़लाक़ी शख्सियत का जिक्र करते हुए कहा कि आपकी ज़िंदगी इंसाफ, शुजाअत और इल्म का बेहतरीन नमूना है। महफिल “नारा-ए-हैदरी” की सदाओं से गूंज उठी।

कासिमुल कादरी साहब ने सैय्यद अशरफ जहाँगीर सिमनानी के मरातिब बयान किए
हज़रत मुफ्ती मोहम्मद कासिमुल कादरी अशरफी नईमी ने अपने ख़िताब में हज़रत सैय्यद अशरफ जहाँगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैह के मरातिब, इल्मी खिदमात और करामात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सिमनानी रहमतुल्लाह अलैह की तालीमात आज भी रूहानियत और इस्लाही जिंदगी के लिए रहनुमा हैं।
नात व शायरी से सजी महफिल
शायर-ए-इस्लाम हज़रत सैय्यद मोहम्मद उवैस मियां ने नातिया अशआर पेश कर महफिल को इश्क़-ए-रसूल ﷺ की खुशबू से महका दिया। महफिल में बार-बार दरूद-ओ-सलाम की सदा बुलंद होती रही।
दुआओं के साथ समापन
कार्यक्रम के आखिर में मुल्क की सलामती, कौमी एकता, अमन-ओ-अमान और उम्मत-ए-मुस्लिमह की भलाई के लिए खास दुआ कराई गई। मोलाना अकबर अली ने तमाम मेहमानों, उलेमा और शहरवासियों का शुक्रिया अदा किया। स्थानीय इमामों ने कहा कि ऐसे दीनी इज्तिमा नई नस्ल को दीन से जोड़ने और इल्म की शमा रोशन रखने का जरिया हैं।
