अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का सख्त रुख, भारत ने टाली व्यापार वार्ता
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का सख्त रुख, भारत ने टाली व्यापार वार्ता
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की वैश्विक टैरिफ़ नीति को निरस्त किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नई बहस शुरू हो गई है। इस फैसले को जहां कई देशों के लिए राहत माना जा रहा है, वहीं ट्रंप ने इसे “गलत” बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने चेतावनी दी कि जो देश अदालत के फैसले का सहारा लेकर अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों पर पुनर्विचार करना चाहेंगे, उन्हें अधिक कड़े टैरिफ़ का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका के साथ “खेल” करने वाले देशों के लिए परिणाम पहले से अधिक सख्त होंगे।
भारत ने स्थगित की वॉशिंगटन यात्रा
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने प्रस्तावित व्यापार वार्ता के लिए वॉशिंगटन भेजे जाने वाले प्रतिनिधिमंडल की यात्रा फिलहाल टाल दी है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनी अनिश्चित स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।
सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दोनों देशों के अधिकारियों के बीच चर्चा के बाद यात्रा को स्थगित किया गया है और नई तारीख अभी तय नहीं हुई है। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना था।
रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित ढांचे में अमेरिका कुछ भारतीय निर्यातों पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ़ में कटौती कर सकता था, जबकि भारत चरणबद्ध तरीके से अमेरिकी उत्पादों की खरीद बढ़ाने पर सहमत था।
भारत की सावधानीपूर्ण रणनीति
भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर औपचारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह निर्णय का अध्ययन कर रही है। जानकारों का मानना है कि भारत फिलहाल संतुलित रणनीति अपना रहा है, ताकि व्यापारिक हितों की रक्षा भी हो और अमेरिका के साथ टकराव से भी बचा जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि रूसी तेल खरीद से जुड़े अतिरिक्त टैरिफ़ का जोखिम कम होता है तो भारत वार्ता में अधिक अनुकूल शर्तों की मांग कर सकता है। हालांकि अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारत सतर्क रुख बनाए रखेगा।
ट्रंप का आक्रामक तेवर जारी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत टैरिफ़ लगाने के विकल्प तलाश सकते हैं। गौरतलब है कि अदालत में कंज़र्वेटिव न्यायाधीशों ने भी उनका समर्थन नहीं किया, जिनमें वे जज भी शामिल हैं जिन्हें ट्रंप ने स्वयं नियुक्त किया था।
विश्लेषकों का कहना है कि इस फैसले से अमेरिका की व्यापारिक रणनीति पर असर पड़ सकता है और चीन, भारत तथा ब्राज़ील जैसे देशों को कुछ हद तक राहत मिल सकती है।
आगे क्या?
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका की नीति स्पष्ट होने के बाद ही वैश्विक व्यापार वार्ताओं की दिशा तय होगी। फिलहाल भारत समेत कई देश स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं।
